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About University

“सत्यम् ज्ञानम् अमृतम्“
यह वाक्य उपनिषद से उद्धत है जो महाविद्यालय का मूल मंत्र है।

महाविद्यालय: एक संक्षिप्त परिचय

बी. एन. जालान महाविद्यालय, छोटानागपुर के दक्षिण पठार पर जनजातीय बहुल गुमला जिला के सिसई प्रखण्ड में अवस्थित है। नगर के कोलाहल एवं प्रदूषण से दूर यह महाविद्यालय सिसई से तीन किलोमीटर पच्छिम की ओर सिसई-बरगाँव पथ पर एक प्राम्य परिवेष में स्थित है। इस शिक्षा मंदिर की स्थापना सन् 1976 ई0 में स्थानीय जनता के सहयोग से हुई थी। ग्रामीणों ने अपनी आशा -आकांक्षा को साकार देखने के लिए लगभग 51 एकड़ भूमि दान में दी। राँची नगर के उद्योगपति एवं प्रसिद्ध समाजसेवी स्वं0 बैजनाथ जालान जी ने महाविद्यालय भवन के निर्माण की जिम्मेवारी अपने हाथों में ली। उनके इस सत्प्रयास का सम्मान करते हुए शासी निकाय ने जनता और विश्वविद्यालय की सहमति प्राप्त कर इसका नाम बी. एन. जालान महाविद्यालय रखा।

शासी निकाय के तत्कालीन सचिव डा0 भुवनेष्वर अनुज एवं अन्य सदस्यों की कर्मठता एवं तत्परता के परिणाम स्वरूप राँची विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार की नीति के अनुरूप इस महाविद्यालय को 14 जुलाई 1976 ई0 से संबद्धता प्रदान की। संबंद्धता दिलाने में भूतपूर्व सांसद एवं भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. कार्तिक उराँव ने अहम भूमिका अदा की।

यह महाविद्यालय अपने समुचित संवर्द्धन तथा संरक्षण पाने को आतुर ही था कि इसे एक शुभ अवसर प्राप्त हुआ जब दिनांक 27 मई 1977 ई0 को नये भवन का शिलान्यास श्रद्धेय स्वं0 प्रेमचंद होरो, तत्कालीन प्रतिकुलपति, राँची विश्वविद्यालय के हाथों संपन्न हुआ। भवन निर्माण के पश्चात इसका विधिवत उद्घाटन 13 फरवरी 1978 ई0 को बिहार के तत्कालीन महामहिम राज्यपाल स्वं0 जगन्नाथ कौशल  के द्वारा किया गया। परिसर का विस्तार करने के क्रम में दिनांक 11.04.2018 ई0  को नए भवन एवं ऑडिटॉरियम का शिलान्यास तत्कालीन माननीय विधानसभा अध्यक्ष डा0 दिनेश उराँव द्वारा किया गया।

महाविद्यालय को सन् 1978 से इंटरमिडिएट स्तर तक एवं सन् 1979 से स्नातक स्तर की संबद्धता, राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय से प्राप्त हुई। 27 अक्टूबर 1986 ई0 को वह स्वर्णिम समय आया जब यह महाविद्यालय राँची विष्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई बन गया।

            संप्रति यह महाविद्यालय कला (मानविकी, समाजविज्ञान) तथा वाणिज्य विषयों में स्नातक स्तर तक एवं स्नातकोतर (एम0 ए) हिन्दी, इतिहास, राजनीति शास्त्र, नागपुरी एवं कुड़ुख तथा वाणिज्य, कला एवं विज्ञान विषयों में +2/इंटरमीडिएट स्तर तक की शिक्षा उपलब्ध कराता है। +2 की कक्षाएं प्रातः 7 बजे से पूर्वाह्न 10.20 तक होती है। कला (मानविकी तथा समाजविज्ञान) एवं वाणिज्य संकायों तथा स्नातकोतर (एम.ए.) की कक्षाएं पूर्वाह्न 10.30 से अपराह्न 4.30 तक चलती हैं।

उत्साह से परिपूर्ण महाविद्यालय प्रबंधन यहाँ के विद्यार्थियों के लिए निम्नलिखित सुविधाएँ शीध्रातिशीध्र प्रारंभ करने के लिए प्रयासरत हैः

1.         ऑनलाइन लाईन नामांकन फॉर्म एवं परीक्षा फॉर्म भरने की सुविधा,

2.         स्मार्ट क्लास रूम, डिजिटल लाईब्रेरी, भाषा पुस्तकालय, वाचनालय, उन्नत प्रयोगषाला आदि की व्यवस्था,

3.         सी.सी. टी. बी. कैमरा द्वारा सुरक्षा की निगरानी,

4.         सौर ऊर्जा से पूरे महाविद्यालय को बिजली प्रदान करने की व्यवस्था,

5.         पीने के शुद्ध पानी एवं स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था आदि।

परिकल्पना

1.         ग्रामीण बच्चों को एक स्तरीय एवं गुणवत्तापूर्ण उच्च षिक्षा प्रदान करना जिससे वे समाज एवं देष का सर्वागींण विकास कर सकें।

2.         बच्चों में समाज एवं देश के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराना।

3.         ज्ञानवर्धन एवं कौषल विकास कर छात्र-छात्राओं को आत्म निर्भर बनाना।

4.         नैतिक मूल्यों को विकसित करना जिससे विद्यार्थी सभ्य, चरित्रवान और सुसंस्कृत नागरिक बनें।

5.         ऐसी मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करना जिससे बच्चे समाज एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनें तथा समाज की कुरीतियों, कुप्रथाओं एवं अंधविष्वास से मुक्त कराना।

विशेष कार्य

1.         गुनवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए स्मार्ट क्लास रूम, उन्नत प्रयोगषाला, समृद्ध पुस्तकालय, लैंग्वेज लैब वाचनालय आदि से युक्त नये भवन का निमार्ण,

2.         सेमिनार तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए प्रेक्षागृह का निमार्ण,

3.         उच्चतर शिक्षा एवं प्रतियोगिता परीक्षा में सफल होने के योग्य बनाने के लिए विषेष कक्षा का आयोजन,

4.         छात्र-छात्राओं को स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना,